नागरिकों का अधिकार पत्र

नागरिकों का अधिकार पत्र

बैंकिंग को एक समृद्धिशाली अनुभव बनाने के लिए विभिन्नप उत्पारदों एवं प्रदान की गई सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखते हुए उचित बैंकिंग परिपाटियों का संवर्धन करना।

  1. ग्राहक सेवा में उत्कृ ष्टुता
  2. समाज के सभी वर्गों को सेवा प्रदान करने हेतु बैंकिंग उत्पाोदों एवं वित्ती।य सेवा में नवोन्मे षता
  3. बहुविध गतिविधियों/सेवाओं के माध्य म से अर्थव्यववस्था के विकास में योगदान देना
  4. सामाजिक बैंकिंग में योगदान देना

डिस्क्लेमर :

यह अधिकार और दायित्व सृजित करने वाला कोई विधिक दस्तातवेज नहीं है। नागरिकों का अधिकार पत्र स्वंवय कोई नया विधिक अधिकार सृजित नहीं करता किंतु यह वर्तमान अधिकारों के प्रवर्तन में निश्चित रूप से मदद करता है।

यह अधिकार पत्र नीचे सूचीबद्ध समस्ता उत्पा दों और सेवाओं पर लागू होता है चाहे वह शाखा द्वारा और बैंक की ओर से कार्य करने वाले एजेंटों द्वारा काउंटर पर, डाक से, इंटर एक्टिव इलेक्ट्रासनिक डिवाइस से और प्रौद्योगिकी (वैकल्पिक डिलीवरी चैनलों) के माध्यदम से प्रदान की गई हो।

केवाईसी अनुपालन:

नियामक/सांविधिक अपेक्षाओं के अनुपालन के उद्देश्यग से, खाता खोलते समय अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) मानदंडों, एंटी मनी लाउंडरिंग दिशानिर्देशों का अनुपालन करेंगे जिससे खाता खोलने वाले व्यतक्ति के पते सहित उस व्यएक्ति की पहचान के बारे में संतुष्टे हुआ जा सके और संभावित ग्राहक(ग्राहकों), जन साधारण और स्वंयं को किसी प्रकार की धोखाधड़ी और बैंकिंग प्रणाली के अन्यत दुरुपयोग से बचाने में मदद मिल सके। हम मौजूदा/संभावित ग्राहकों की आय के स्रोतों के बारे में भी स्वजयं संतुष्टा होंगे। ग्राहक प्रस्तु तीकरण की आवधिकता के अनुसार उन्न यन और सत्याजपन हेतु बैंक की अपेक्षाअनुसार वांछित दस्तांवेज भी उपलब्धक कराएंगे

उत्पाेद:

  1. सभी जमा खाते अर्थात बचत खाते, चालू खाते, मीयादी जमा, आवर्ती जमा, एनआरई, एफसीएनआर, एनआरओ
  2. सभी जमा खातों(अर्थात व्यलक्तिगत/प्रोपराइटरशिप की हैसियत से खोले गए खाते) और सरुक्षित जमा लाकर किराए पर लेने वाले सभी व्यपक्तियों(अर्थात व्येक्तिगत किराएदार) को नामांकन सुविधा उपलब्धप कराना
  3. निधि आधारित( खुदरा ऋण, मांग ऋण, सावधि ऋण, नकदी ऋण, ओरड्राफ्ट) और गैर निधि आधारित ऋण (साख पत्र/बैंक गारंटी)
  4. विप्रेषण एवं मुद्रा परिवर्तन सहित विदेशी मुद्रा उत्पाऋद
  5. तृतीय पक्ष उत्पा द एवं निवेश उत्पातद
  6. डीमेट खाते एवं एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लादक्डर एमाउंट(एएसबीए) सुविधा
  7. क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, एटीएम कार्ड, स्माएर्ट कार्ड सहित कार्ड उत्पाेद

सेवाएं

  1. आरटीजीएस/एनईएफटी/ईएफटी/मांग ड्राफ्ट, बैंकर्स चेक निर्गम आदि के माध्यतम से ग्रहकों को विप्रेषण सुविधा।
  2. पेंशन संबंध भुगतान सेवाएं
  3. चेकों का संग्रहण(वसूली)
  4. सेफ डिपाजिट सेवा, सेफ डिपाजिट लाकर सुविधा
  5. सरकारी लेनदेन से संबंधित सरकारी सेवाएं
  6. भारतीय करेंसी नोट की अदला बदली की सुविधा
  7. मृतक के खाते में दावों के मामलों का निपटान
  8. इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं

(i) निम्नलिखित मामलों में ग्राहकों से सभी प्रकार के व्यंवहार करते समय निष्पधक्ष एवं समुचित रूप से कार्य करना।

  1. बैंक काउंटर पर नकदी/चेकों की प्राप्ति एवं भुगतान की न्यूहनतम बैंकिंग सेवा उपलब्धम कराना। सभी नो फ्रिल खातों में बुनियादी बैंकिंग सेवाएं उपलब्धा कराई जाती हैं।
  2. प्रस्तुंत उत्पांदों और सेवाओं तथा अनुपालन की जाने वाली प्रक्रियाओं और परिपाटियों हेतु अधिकारि पत्र में दिए गए मानकों और प्रतिबद्धताओं को पूरा करना।
  3. यह सुनिश्चित करना कि उत्पांद और सेवाएं अक्षरश: प्रासंगिक विधियों और विनियमों को पूरा करें।
  4. ग्राहकों के साथ सत्य निष्ठा और पारदर्शिता के नैतिक सिद्धांतों के अनुसार संव्यतवहार करना।
  5. एक सुरक्षित और विश्व सनीय बैंकिंग एवं भुगतान प्रणाली परिचालित करना।
  6. ग्राहकों से संबंधित मामलों में त्रुटि, विलम्बह अथवा प्रौद्योगिकी फेल होने के कारण उत्प.न्न समस्याोओं के संबंध में ग्राहकों की शिकायतों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं त्वतरित रूप से कार्यवाई करना।

     

(ii) बैंक की वेबसाइट पर प्रदर्शन

  1. योजना के बारे में जनता में जागरूकता: भारतीय रिजर्व बैंक और बैंकिंग लोकपाल कार्यालय जागरूकता अभियान, संपर्क कार्यक्रमों, प्रिंट मीडिया, आकाशवाणी, दूरदर्शन के माध्यकम से प्रचार के द्वारा जनता को बैंकिंग लोकपाल योजना के बारे में शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। तथापि, बैंक द्वारा किए गए इन प्रयासों के अनुपूरक के रूप में बैंक द्वारा भेजे गए सभी संप्रेषण बैंकिंग लोकपाल योजना और इसकी प्रयोज्य ता में शामिल होंगे।
  2. नीतियां शाखाओं के भौगोलिक विस्तालर, ग्राहकों के वर्ग, वरिष्ठे नागरिकों, विधवाओं, शारीरिक रूप से अशक्तओ व्य क्तियों आदि जैसे विशेष वर्गों की आवश्य्कता को ध्याउन में रखते हुए ग्राहकों की सुविधा के स्पवष्टि दृष्टिकोण वाली होनी चाहिए। यह नीति विभिन्नं उत्पाहदों और सेवाओं की विशेषताओं को भी स्पयष्टआ रूप से परिभाषित करेगी और इनमें अंतर बताएगी और लक्षित ग्राहक समूह को उल्लिखित करेगी।
  3. वित्ती य शिक्षा पहलुओं पर बैंक का दृष्टिकोण एक नीतिगत ढांचे के माध्यिम से प्रलेखित है।
  4. बैंक के कर्मचारियों द्वारा ‘ग्राहकवर्ग पहले प्रवृत्ति’ विकसित करने पर बैंक के दृष्टिकोण ग्राहक संकेंद्रित विभिन्नक नीतियों के माध्य्म से प्रलेखित किया गया है जिसमें सकारात्म क प्रवृत्तिगत परिवर्तन, व्योवहार और परिपाटी जैसे पहलू शामिल हैं।
  5. बैंक द्वारा तैयार की गई नीति यह सुनिश्चित करती है कि हर प्रकार की शिकायत के प्रत्युसत्तरर हेतु निर्धारित समय सीमा बैंक के शीर्ष प्रबंधन द्वारा अनुमोदित की गई है।
  6. बैंक वार्षिक रूप से अपनी नीतियों/परिचालनात्म क दिशानिर्देशों को संहिताबद्ध करता है जिससे फ्रंट-लाइन स्टापफ को ग्राहकों को सेवा प्रदान करने में मदद मिलेगी।
  7. बैंक की आंतरिक निरीक्षण/लेखापरीक्षा रिपोर्टें पर्याप्ते रूप से ग्राहक सेवा पर केंद्रित हैं और लेखापरीक्षा रेटिंग में ग्राहक सेवा को समुचित महत्व् दिया गया है।
  8. ग्राहक स्वींकृति, ग्राहक सुविधा और ग्राहक पृथक्क रण की व्याेपक नीति।
    1. (क) जमा नीति।
    2. (ख) चेक संग्रहण नीति।
    3. (ग) शिकायत निवारण नीति।
    4. (घ) क्षतिपूर्ति नीति।
    5. (ङ) बकाया संग्रहण और प्रतिभूति रिपोजेशन नीति।

(iii) निम्नयलिखित मामलों को छोड़कर ग्राहकों की व्येक्तिगत जानकारी की निजता और गोपनीयता को बनाए रखना। तथापि, बैंक अपने खुद के उत्पाीदों/सेवाओं की क्रास सेलिंग हेतु इस जानकारी का उपयोग कर सकता है।

  1. जहां प्रकटीकरण विधि के अंतर्गत बाध्यैकारी हो।
  2. जहां जनता के सम्मुणख प्रकट करना कर्तव्या बनता हो।
  3. जहां बैंक के हित में प्रकटीकरण अपेक्षित हो।
  4. जहां प्रकटीकरण ग्राहक की व्यरक्तह अथवा अंतर्निहित सहमति से किया गया हो।

(iv) अधिकार पत्र का प्रचार करना

  1. a. ग्राहक को उसके अनुरोध करने पर अधिकारपत्र की प्रति उपलब्धं कराना।
  2. b. अधिकारपत्र को बैंक की वेबसाइट पर उपलब्धप करवाना।
  3. c. अधिकार पत्र को व्य वहार में लाने हेतु स्टाबफ को प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करना।

(v) भारतीय बैंकिंग संहिता और मानक बोर्ड के ग्राहकों के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता कोड में निर्धारित मानकों के अनुसार ग्राहकों को सेवा प्रदान करना

  1. सुझावों/प्रतिसूचनाओं का स्वाागत है
  2. व्यावसाय समय को प्रदर्शित करना।
  3. विनम्र सेवा प्रदान करना।
  4. व्यमवसाय समय की समाप्ति पर बैंकिंग हाल में उपस्थित सभी ग्राहकों को सेवा प्रदान करना।
  5. बड़ी शाखाओं में अलग से ‘पूछताछ’ अथवा ‘क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूं’ काउंटर उपलब्धश कराया जाना।
  6. समय-समय पर विभिन्नम जमा योजनाओं की ब्या‘ज दरों को प्रदर्शित करना।
  7. ग्राहकों को बैंक की वैबसाइट के माध्यनम से ब्यायज दरों, प्रभारों, निबंधनों एवं शर्तों में परिवर्तन/संशोधन के बारे में जानकारी देते रहना।
  8. बैंक की वेबसाइट पर बैंक की विभिन्न‍ जमा योजनाओं/सेवाओं का विवरण उपलब्ध। कराना
  9. विभिन्न बैंकिंग लेनदेन हेतु समय मानदंड प्रदर्शित करना।
  10. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर दी गई सूचना के अनुसार बाहरी केन्द्रब के चेकों को विलम्बत से जमा करने पर ब्यासज का भुगतान।
  11. निर्दिष्टं सीमा तक के बाहरी एवं स्था नीय चेकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय समय पर यथासूचित शर्तों के अधीन तत्कााल जमा लिखा जाना।
  12. शाखा परिसरों में शिकायत रजिस्टार/फार्म एवं सुझाव पेटी उपलब्ध कराना।
  13. ग्राहक शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले प्रशासनिक कार्यालयों के साथ-साथ नोडल अधिकारियों/मुख्यो होस्ट का पता प्रदर्शित करना। जिन शाखाओं में भारी भीड़ होती है वहां विनिर्दिष्ट/ एवं समुचित लाइन की व्यटवस्था् करना तथा बैठने एवं पेय जल आदि जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना।
  14. बैंक ‘वन मैन’ शाखाओं के संबंध में समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कतिपय मुद्दों का समाधान करेगा जिसमें ‘फोर आईज’ सिद्धांतों, नकदी की सुरक्षा और अवकाश आदि के मामले में शाखा में सेवा जारी रखना सुनिश्चित करना शामिल है।
  15. खाता खोलते समय अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) विनियामक दिशानिर्देशों के अनुसार हमें कुछ दस्ताहवेज प्राप्तज करना अपेक्षित होता है (i) पहचान का प्रमाण और (ii) पते का प्रमाण। खाता खोलने हेतु अपेक्षित दस्तािवेज खंड 5 में दिए गए हैं।
  16. वित्तीुय समावेशन के अंतर्गत निर्धारित न्यूसनतम शेष, उन खातों को छोड़कर जिन्हें विशेष रूप से मुक्तु रखा गया है, के साथ नो-फ्रिल खाते खोलना।
  17. व्योक्तियों के नाम से, एकल अथवा संयुक्तट रूप से, 10 वर्ष या अधिक उम्र के अवयस्के अथवा नैसर्गिक/विधिक अभिभावकता के अंतर्गत अथवा निरक्षर/दृष्टिहीन व्य क्तियों के बचत बैंक खाते खोलना।
  18. नामे प्रविष्टि के मामले में आदाता का नाम और लिखत की संख्याक तथा जमा प्रविष्टि के मामले में आदाता बैंक/लिखत के आहर्ता का नाम और लिखत संख्या बैंक की पासबुक/खाते के विवरण में उपलब्धआ कराई जाएगी।
  19. एक शाखा से दूसरी शाखा में खाते का निशुल्की अंतरण।
  20. खाता संख्याि पोर्टबिलिटी: ग्राहक को किसी अन्यप शहर में अंतरित होने अथवा उसी शहर की किसी अन्यख शाखा में खाता अंतरित करने पर वही खाता संख्याअ रखने की अनुमति है। खाता अंतरित करने हेतु अनुरोध पत्र खाता संख्या पोर्टबिलिटि सहित मूल शाखा में प्रस्तु त किया जाना चाहिए और उपयोग में न लाई गई चेक बुक एवं एटीएम कार्ड जमा कर देने चाहिए।
  21. बीमा प्रीमियम, किराया, कर आदि के नियमित भुगतान हेतु स्थाडयी अनुदेश की सुविधा उपलब्धे कराना।
  22. जब तक अन्यंथा विनिर्दिष्टी न हो, परिपक्वतता पूर्व आहरण की अनुमति, संविदागत दर अथवा जिनती अवधि तक जमा राशि बैंक में रही है, उस अवधि की ब्यापज दर, जो भी कम हो पर दी जाएगी जो बैंक द्वारा निर्धारित अर्थदंड के अध्यवधीन होगी। निर्धारित न्यूोनतम दिनों से कम अवधि हेतु बैंक में रखी गई सावधि जमा रसीद के परिपक्वरता-पूर्व आहरण पर किसी ब्या ज का भुगतान नहीं किया जाएगा।
  23. मृतक जमाकर्ताओं के नाम से सावधि जमाराशि के समयपूर्व आहरण की अनुमति ऐसी सावधि जमा रसीद जारी करते समय जमाकर्ता द्वारा विनिर्दिष्टम उत्तणरजीवी/नामिती को दी जाएगी। अतिदेय सावधि जमा पर बैंक समय-समय पर निर्धारित गणना पद्धति के अनुसार ब्यासज का भुगतान कर सकता है।
  24. जमा प्रमाणपत्र (सीडी), कर बचत योजना/कैपिटल गेन योजना के अलावा सामान्य त: जमाराशियों के सापेक्ष ऋण/ओवरड्राफ्ट की अनुमति दी जाती है।
  25. अच्छीय ग्राहक सेवा के उपाय के रूप में, बैंक जमाकर्ता को परिपक्वनता तिथि के संबंध में ग्राहकों को पहले से सूचित कर सकता है। बैंक ग्राहकों के अनुरोध पर स्वकत: नवीकरण सुविधा भी उपलब्ध करा सकता है। सावधि जमा नवीकरण नोटिस वरीयत: इलेक्ट्रा निक रूप में ग्राहकों को भेजा जाएगा जिससे वे नवीकरण की अवधि के बारे में निर्णय ले सकें। सभी जमा खातों का विवरण सारांश रूप में जिसमें मूलधन, परिपक्वकता मूल्यय, परिपक्वोता तिथि, ब्याजज दर, वार्षिकीकृत ब्यामज आय आदि का विवरण होगा, बैंक द्वारा उपलब्धक कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त,, बैंक ग्राहक की लिखित सहमति के बिना जमा खाते का स्व त: नवीकरण नहीं करेगा।
  26. जमा राशि पर या तो मासिक रूप से डिस्का उंटेड मूल्या पर अथवा तिमाही या अर्धवार्षिक रूप से (तिमाही चक्रवृद्धि अर्थात ब्याधज का पुनर्निवेश) या परिपक्व्ता की तिथि पर उस विशिष्ट जमा योजना के अंतर्गत जमाकर्ता की राय से ब्यारज का भुगतान। रु.20000/- और अधिक की मासिक प्राप्तियों का भुगतान एकाउंट पेई चेक द्वारा अथवा खाते में जमा लिखते हुए किया जाएगा। यदि एफडीअर/टीडीआर का मूलधन+ब्या ज रु.20000/- और अधिक है तो इसका नकद भुगतान नहीं किया जाएगा।
  1. (क) टीडीएस विवरण उपलब्धए कराना जिसमें स्प्ष्टह रूप से जमा किए गए सकल ब्याकज और नामें लिखे गए टीडीएस का विवरण हो।
  2. (ख) समय-समय पर बैंक द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार अतिदेय जमाराशि पर ब्याखज का भुगतान यदि जमाराशि नवीकृत की जाती है।
  3. (ग) मूल एफडीआर गुम हो जाने की स्थिति में डुप्लिकेट एफडीआर जारी करना बशर्ते कि जमाकर्ता समय-समय बैंक द्वारा निर्धारित अपेक्षित औपचारिकताओं को पूरा करे।
  4. (घ) विभिन्नन उत्पा दों जैसे पीपीएफ अथवा किसी विशेष वर्ग, यथा वरिष्ठआ नागरिकों हेतु शुरु कि गए किन्हीं भावी उत्पाअदों, जो बैंक द्वारा एजेंसी आधार पर उपलब्धो कराए जाते हैं के निबंधनों और शर्तों को सीबीएस में समुचित रूप से एकीकृत कर लिंकेज उपलबध कराना।

(vi) विशेष ग्राहक

(क) पेंशनर एवं अन्य् वरिष्ठं नागरिक-

  • सभी शाखाओं में कारगर भीड़/जन प्रबंधन द्वारा वरिष्ठर नागरिकों, शारीरिक रूप से विकलांग व्य क्तियों को प्राथमिकता आधार पर सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • आयु के संबंध में स्वजत: अद्यतन अभिलेख उपलब्ध‍ कराना और जब ग्राहक वरिष्ठु नागरिक बन जाता है तो उसे यथाप्रयोज्य् वरिष्ठल नागरिक लाभ प्रदान करना।
  • शाखा की स्थिति और इस तक पहुंच का निर्णय करते समय वरिष्ठर नागरिकों और शारीरिक रूप से विकलांग व्यहक्तियों की आवश्यवकता बैंक के लिए महत्वरपूर्ण बिंदु होता है।

(ख) ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में ग्राहक

  • बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में समुचित करेंसी नोट अदला-बदली सुविधा और अच्छे् नोटों का परिचालन सुनिश्चित करेगा।
  • यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शाखाएं अपने निर्धारित समय पर खुलें और पूरे समय तक कार्य करें।

(ग) स्वायं सहायता समूह (एसएचजी)-

  • एसएचजी सदस्योंव को बीमा उत्पाूद लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  • बैंक एसएचजी को ऋण उपलब्धा कराएगा। तथापि इसे मात्र एसएचजी द्वारा की गई चुकौती पर निर्भर होने के बजाय एसएचजी की व्याथवसायिक आवश्यजकताओं को ध्यातन में रखा जाएगा।

(घ) आदिवासी क्षेत्र/पूर्वोत्तसर क्षेत्र -

  • आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं में सुधार हेतु व्यकवसाय प्रतिनिधि/फेसिलिटेटर माडल का प्रयोग किया जाएगा।
  • बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी क्षेत्रों में शाखाओं में कम से कम एक स्टाबफ स्थाकनीय भाषा का जानकार हो।
  • आदिवासी क्षेत्रों में वित्तीएय शिक्षा सामग्री का चित्र रूप में तथा स्थाटनीय बोली में आडियो प्रेजेंटेशन का प्रयोग किया जाएगा।
  • बैंकिंग/वित्तीपय समावेशन हासिल करने के लिए बैंक का प्रयास होगा कि यह क्षेत्र में स्टािफ के स्थािनांतरण एवं पदस्थारपना हेतु भारतीय रिजर्व बैंक एवं भारत सरकार द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों को कार्यान्वित करे। इसके अतिरिक्त , इस प्रकार चयनित एवं पदस्थागपित स्टांफ स्थािनीय प्रतिभा निर्माण एवं विकास पर ध्याान केंद्रित करेंगे।
  • बैंक इस क्षेत्र में वित्तीेय समावेश को बढ़ावा देने हेतु क्षेत्र में एसएचजी खाते खोलने में मदद करेगा।
  • बैंक इन क्षेत्रों में आरटीजीएस/एनईएफटी सुविधा के प्रावधान को बढ़ाने हेतु कदम उठाएगा।

(ड.) दृष्टि विकलांग व्यसक्तियों को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करना

  • दृष्टि विकलांग व्यपक्तियों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्यं से बैंक ऐसे दृष्टि विकलांग व्यगक्तियों को चेक बुक सुविधा/एटीएम/लाकर परिचालन सुविधा आदि सहित बैंकिंग सुविधाएं प्रस्तुयत करेगा जो इन सुविधाओं का उपयोग करने में सक्षम हैं।
  • राष्ट्री य न्यातस अधिनियम 1999 के अंतर्गत जारी लीगत गार्जियनशिप सर्टिफिकेट आटिज्मष, सेरब्रल पाल्सीि, मेंटल रिटार्डेशन एवं मल्टी डिसेबिलिटी जैसे अशक्तध व्यजक्तियों को खाता खोलने का अधिकार प्रदान करता है।
  • बैंक खाते खोलने/खातों के परिचालन के प्रयोजन से बैंक या तो मानसिक स्वािस्य्ा् अधिनियम के अंतर्गत जिला न्याखयालय द्वारा अथवा उक्तब अधिनियम के अंतर्गत स्थािनीय स्तलरीय समितियों द्वारा जारी गार्जियनशिप सर्टिफिकेट पर विश्वा्स करेगा।
  • सुविधाओं से संबंधित आवश्यरक विवरण इनेक्टरमेंट(मेंटल डिसेबिलिटीज एक्टा) में दिया गया है।

(vii) मृतक ग्राहकों के खातों में बकाया शेष का उत्तटरजीवियों/दावेदारों को भुगतान

बैंक उत्त्राधिकार प्रमाण प्रस्तुहत करने पर बल दिए बिना मृतक संबंध दावों के निपटान की सरलीकृत प्रक्रिया अपनाता है। तथापि, बैंक दावों के निपटान पर विचार करते समय क्षतिपूर्ति बंधपत्र स्वीरकार करने सहित ऐसे सुरक्षोपाय अपना सकता है जो समुचित हों। बैंक जमाराशियों, लाकर में रखी वस्तुोओं और बैंक की सुारक्षित अभिरक्षा में रखी वस्तुाओं के संबंध में मृतक ग्राहकों से संबंधित दावों के निपटान की सरलीकृत प्रक्रिया अपनाता है। बैंक लगातार ग्राहकों को बैंकिंग विनियमन अधिनियम के अनुसार खातों में नामांकन करने हेतु सूचित करता रहता है।
सरलीकृत प्रक्रिया निम्नाोनुसार है:

(क) नामांकन के आधार पर दावा मामलों का निपटान
जहां ग्राहक ने जमा खाते/लाकर/सुरक्षित अभिरक्षा में रखी वस्तुेओं के संबंध में नामांकन किया है वहां ऐसे ग्राहक की मृत्युा होने पर नामित व्याक्ति से अपेक्षित होता है कि वह मृत्यु प्रमाण पत्र अथवा मृत्युर संबंधी अन्य् साक्ष्य के साथ संबंधित शाखा में निर्धारित फार्म में अनुरोध करे।
नामिती को अपनी पहचान सिद्ध करना अपेक्षित है। बैंक नामिती को भुगतान करेगा बशर्ते कि भुगतान के समय अथवा इससे पूर्व न्यानयालय का कोई ऐसा आदेश प्राप्त न हो जाए जो बैंक को ऐसा भुगतान करने से रोकता हो। नामिती मृतक व्याक्तियों के कानूनी वारिसों के न्या सी के रूप में धनराशि/लाकर में रखी वस्तुवएं प्राप्त करेगा।

(ख) उत्तरजीविता खंड वाले संयुक्त खातों में दावा मामलों का निपटान
संयुक्तम खाते में किसी एक खाताधारक की मृत्युध होने पर शेष राशि का भुगतान उत्तकरजीवी को करने का प्रावधान यदि खाता खोलने के फार्म में उपलब्धर है तो उत्तकरजीवी को भुगतान किया जा सकता है बशर्ते कि भुगतान के समय अथवा इससे पूर्व न्याीयालय का कोई ऐसा आदेश प्राप्ते न हो जाए जो बैंक को ऐसा भुगतान करने से रोकता हो। उत्तारजीवी को मृत्युह प्रमाण पत्र अथवा संयुक्तत खाताधारक की मृत्युत संबंधी अन्यआ साक्ष्य प्रस्तुुत करना होगा। उत्त‍रजीवी शेष राशि अपने नाम में अंतरित कराने हेतु संबंधित शाखा में अनुरोध कर सकता है।

(ग) नामांकन और/अथवा उत्तेरजीविता खंड के अभाव में दावों का निपटान
ऐसे मामलों में दावेदार द्वारा दावा फार्म प्रस्तुनत किया जाना अपेक्षित है। यदि मृतक ग्राहक के कानूनी वारिसों की पहचान की जा सकती हो और कानूनी वारिसों के बीच कोई विवाद न हो तो बैंक ने कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं की है जिसके दावे का निपटान उत्तोराधिकार प्रमाणपत्र/ प्रशासन पत्र आदि प्राप्तम करने का आग्रह किए बिना न किया जा सकता हो। ऐसे दावों का निपटान बैंक की संतुष्टि के अनुसार प्रतिभू सहित या उसके बिना क्षतिपूर्ति प्राप्तै करने के बाद किया जा सकता है। यदि कानूनी वारिसों में से केवल एक वारिस धनराशि अथवा लाकर की वस्तुहओं आदि का दावा करता है/प्राप्तर करता है तो वह धनराशि अथवा लाकर की वस्तुहओं आदि प्राप्त करने के लिए अन्यत कानूनी वारिसों से अपने पक्ष में मुख्ताैरनामा प्राप्तत कर सकता है।

(घ) निपटान की समय सीमा
यदि दावेदारों द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं तो शाखा में हर तरह से पूर्ण दावा प्रलेख प्रस्तुतत किए जाने की तिथि से 15 दिनों के अंदर दावे का निपटान किया जाएगा। दावे का भुगतान करते समय दावेदार शाखा को रसीद देंगे।

(viii) गंदे/थोड़ा बहुत कटे-फटे करेंसी नोटों की अदला-बदली

बैंक की सभी शाखाएं सभी मूल्यल वर्ग के गंदे और मामूली रूप से कटे-फटे नोटों को बेरोकटोक बदलेंगी। नोट का कोई अनिवार्य भाग छूटना नहीं चाहिए। बैंक की करेंसी चेस्टट शाखाएं कटे/फटे/त्रुटिपूर्ण नोटों को निशुल्कस बदलेंगी। करेंसी अदला-बदली की सुविधा बैंक के ग्राहकों एवं अन्यफ लोगों को दी जाती है। बैंक इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का पालन करता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने ऐसे कटे-फटे नोटों को बदलने की अनुमति प्रदान की है जो वास्तीविक हैं और नोटों के कटे-फटे होने में किसी संदेह अथवा धोखाधड़ी की संभावना न हो। बैंक की करेंसी चेस्टे शाखाएं सभी श्रेणी के कटे-फटे नोटों की अदला-बदली करती हैं। तथापि, इन नोटों का रिफंड मूल्यो भारतीय रिजर्व बैंक(नोट रिफंड) नियम के अनुसार अदा किया जाता है। करेंसी अदला बदली की सुविधा बैंक के ग्राहकों एवं अन्या लोगों को दी जाती है।

(ix) सुरक्षित जमा वाल्ट (लाकर)

सुरक्षित जमा लाकर सुविधा बैंक द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुषंगी सेवा है। लाकर सुविधा का आंबटन करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। लाकर सुविधा प्रदान करने वाली शाखाओं का अभिनिर्धारण बैंक द्वारा संभाव्योता और वाणिज्यिक प्रतिफल के आधार पर अपने विवेकानुसार किया जाएगा। बैंक ग्राहकों को प्रदान किए गए लाकर की सुरक्षा हेतु समुचित ध्यानन एवं आवश्ययक एहतियात बरतेगा जैसा कि इस मामले में सामान्यस विवेक के अनुसार किया जाना चाहिए। तथापि, किसी भी कारणवश लाकर अथवा लाकर में रखी वस्तु ओं की क्षति अथवा उनके गुम हो जाने पर बैंक उत्तंरदायी नहीं होगा।
इस सेवा को शासित करने वाले मुख्यं पहलू इस प्रकार हैं:

  1. लाकर किसी व्ययक्ति(अवयस्कि नहीं), फर्म, लिमिटेड कंपनी, विनिर्दिष्ट ऐसोसिएशनों और सोसाइटियों आदि द्वारा किराए पर लिए जा सकते हैं।
  2. सुरक्षित जमा लाकर के व्यरक्तिगत किराएदार हेतु नामांकन सुविधा उपलब्धभ है।
  3. लाकर की चाबी गुम हो जाने की सूचना तत्कािल शाखा को दी जानी चाहिए। तथापि ताला और चाबी की मरम्म त से संबंधित सभी व्याय किराएदार द्वारा वहन किए जाएंगे।
  4. किराए पर लेने वाला व्य।क्ति लाकर में अपना खुद का पैड लाक लगा सकता है। तथापि लाकर धारक को लाकर में रखे जेवर, मूल्यनवान वस्तु ओं आदि का बीमा कवर करने की सलाह दी जानी चाहिए।
  5. लाकर विभिन्नज आकार में उपलब्धन होते हैं।
  6. लाकर न्यूकनतम एक वर्ष की अवधि हेतु किराए पर दिया जाता है। किराया अग्रिम रूप से देय होता है। किराया अतिदेय होने पर बैंक समय-समय पर यथानिर्णीत अर्थदंड प्रभारित करेगा।
  7. लाकर किराए का भुगतान स्थाकयी अनुदेश के माध्य-म से किराएदार के बचत खाते से किया जा सकता है।
  8. यदि बैंक द्वारा नियमानुसार नोटिस दिए जाने के बावजूद किराए का भुगतान नहीं किया जाता है तो लाकर को तोड़ कर खोलने और दसका प्रभार वसूलने का बैंक का अधिकार सुरक्षित है।
  9. सुरक्षित जमा वाल्टर की सुविधा बैंक में जमा खाता रखने वाले ग्राहकों को उपलब्ध् है। उक्त सुविधा का लाभ उठाने हेतु ग्राहक को सावधि जमाराशि के रूप में तीन वर्षो की अवधि हेतु निर्धारित राशि जमा करनी होगी जिसके ब्यााज से लाकर के वार्षिक किराए और जरूरत पड़ने पर ब्रेक ओपन प्रभार वसूला जाएगा।

(x) सुरक्षित अभिरक्षा में वस्तु्एं

शेयर, प्रतिभूतियां जैसी वस्तुेएं बैंक की सुरक्षित अभिरक्षा में, जहां यह सुविधा प्रदान की गई है, निर्धारित प्रभार देकर रखी जा सकती हैं। बड़े/छोटे बक्सोंे पर ग्राहक द्वारा ताला लगाया जाना चाहिए और उस पर विवरण लिखा/पेंट किया जाना चाहिए। ताले को मजबूत कपड़े से ढका जाना चाहिए और ग्राहक की मुहर से मुहरबंद किया जाना चाहिए। बैंकर और ग्राहक का संबंध अमानत रखने वाला और अमानदार का होगा।

(xi) विप्रेषण सेवाएं

  • ग्राहकगण विनिर्दिष्टए प्रभार का भुगतान कर एक केन्द्र से दूसरे केन्द्र में निधियों का अंतरण आरटीजीएस/एनईएफटी/ईएफटी और मांग ड्राफ्ट के द्वारा कर सकते हैं।
  • रु.50000/- और अधिक का मांग ड्राफ्ट बैंक द्वारा केवल ग्राहक के खाते को नामे लिखकर अथवा क्रेता द्वारा प्रस्तु त चेक अथवा अन्या लिखित पर जारी किया जाएगा नकद भुगतान से नहीं। इसी प्रकार रु.50000/- और अधिक के भुगतान बैंकिंग चैनल के माध्य म से किए जाएंगे न कि नगद।
  • ड्राफ्ट की सुपुर्दगी लेने से पूर्व ग्राहक यह सत्यादपित कर ले कि ड्राफ्ट हर प्रकार से संपूर्ण है अर्थात उसमें निर्धारित स्था्न पर अधिकारियों के हस्ताकक्षर, उनके नमूना हस्ता्क्ष्ासर संख्याा सहित मौजूद हैं।

  • ड्राफ्टों को उनके जारी होने की तिथि से वर्ष में केवल एक बार पुन: वैध किया जा सकता है। एक वर्ष बाद ऐसे ड्राफ्टों को जारीकर्ता शाखा में निरस्त किया जाना होता है और अपेक्षित सेवा प्रभार का भुगतान करने के बाद नया ड्राफ्ट प्राप्त‍ किया जाता है।
  • ग्राहक से अनुरोध प्राप्त् होने पर बैंक एक पखवाड़े के अंदर डुप्लिकेट मांग ड्राफ्ट जारी करेगा। डुप्लिकेट मांग ड्राफ्ट जारी करने में उक्तक निर्धारित अवधि से अधिक विलम्बा होने पर ग्राहक को ऐसे विलम्बर की क्षतिपूर्ति देने हेतु बैंक उतनी अवधि की सावधि जमाराशि की परिपक्वरता पर प्रयोज्य दर से ब्या ज का भुगतान करेगा।

(xii) एटीएम/डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन

पूर्वोत्ततर क्षेत्र में शाखाएं एटीएम मशीन हेतु बिजली की आपूर्ति के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों से बैकअप की व्य्वस्थाा करने का प्रयास करेंगी जिससे ग्राहकों को लगातार सेवा सुनिश्चित की जा सके। एटीएम लेनदेन के सफल/विफल होने के बारे में संदेह होने पर अधिग्रहण बैंक से जेपी लॉग की प्रति मांगी जाए और उस प्रति में पूर्ववर्ती और उत्तअरवर्ती लेनदेन भी शामिल होंगे।

(xiii) मोबाइल बैंकिंग

ट्रांजेक्शथन मूल्य , ट्रांजेक्श न का स्थाऔन, हैंडसेट आधारित सुरक्षा, भुगतान की आवर्ती शुरु की जाएगी। बैंक प्रतिसूचना प्राप्तज करने हेतु यूजर समुदाय के गठन को प्रोत्साटहित करेगा और साथ ही उनके उत्पा्दों की की दक्षता बढ़ाएगा और नए उत्पानद तैयार करेगा।

(xiv) एसएमएस/ई-मेल एलर्ट:

यदि ग्राहक अनुरोध करता है तो पीडीएफ फार्मेट में खाते का विवरण ई-मेल से भेजा जाएगा ( पासवर्ड इनक्रिप्टेमड प्रलेख) बैंक चालू खाता धारकों के उच्चा मूल्य के लेनदेन के संबंध में तय अवधि अर्थात दैनिक, साप्तााहिक, पाक्षिक आवधिकता पर खाते में शेष की स्थिति सूचित करने वाला ई-मेल भेजेगा।

(xv) ईसीएस अधिदेश प्रबंधन प्रणाली

बैंक सुनिश्चित करेगा कि ग्राहक द्वारा नामे राशि की सीमा, अवधि समाप्ति की तिथि, अधिदेश वापस लेने आदि के संबंध में दिए गए अनुदेश का अनुपालन करने हेतु ईसीएस अधिदेश प्रबंधन प्रणाली कारगर ढंग से कार्य करे। किसी ईसीएस नामे भुगतान हेतु अधिदेश को वापस लेना लाभार्थी की दया पर नहीं छोड़ा जाएगा।

(xvi) ऋण एवं अग्रिम

  • ऋणों की कीमत निर्धारण और गैर-कीमत निर्धारण निबंधन और शर्तें नियामक दिशानिर्देशों के अनुरूप ही होंगी और व्यकक्तिगत रूप से अथवा वर्ग के रूप में संबंधित उधारकर्ताओं की रेटिंग और निहित जोखिम को सही रूप से कैप्चथर किया जाएगा। विनियम यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्राहक बैंक की कीमत निर्धारण (प्राइसिंग) नीतियों को स्प ष्टच रूप से समझ रहा है तथा पर्यवेक्षण सभी ऋणों को शासित करने वाली प्राइसिंग एवं गैर-प्रइसिंग संबंधी विनियामक दिशानिर्देशों का बैक द्वारा सख्तीव से अनुपालन किया जाना सुनिश्चित करेगा।
  • सीबीएस साफ्टवेयर को इस प्रकार समर्थ बनाया जाएगा कि यह रिटेल ऋण पर लागू निम्नीलिखित प्रावधान की व्यरवस्थान करेगा और बैंक के पोर्टल तथा इंटरनेट बैंकिंग में उपलब्धब होगा। ऋण खातों में दंडात्मयक ब्याकज लगाने का कारण, ऋण खातों में प्रभारित ब्या्ज दर आदि का उल्लेंख पासबुक/खातें के विवरण में किया जाएगा।
  • उधारकर्ताओं को प्रतिवर्ष आयकर के प्रयोजन हेतु गृह ऋण ब्याबज प्रमाणपत्र/शिक्षा ऋण ब्याउज प्रमाणपत्र की आवश्येकता पड़ती है। सीबीएस साफ्टवेयर प्रतिवर्ष अप्रैल माह में सभी गृह ऋण एवं शिक्षा ऋण लेने वाले उधारकर्ताओं को ऐसे प्रमाणपत्र जनरेट/जारी करने हेतु समर्थ होगा।
  • बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि उधारकर्ताओं को ऋण विवरण आवधिक रूप से जारी किए जाएं जिनमें संवितरित ऋण, ब्याओज सहित की गई मांग और चुकौती तथा प्रभारों का विवरण दिया जाएगा।
  • उधारकर्ताओं को खंडश: जानकारी देने की बजाय एक बार में ही ऋण आवेदन की प्रोसेसिंग हेतु अपेक्षित विभिन्नध दस्ताेवेजों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
  • बैंक ग्राहकों से अनुरोध प्राप्तस किए बिना स्वलत: ही गृह ऋण ग्राहकों को खाते का वार्षिक विवरण उपलब्धस कराएगा। ऐसे विवरणों में बकाया मूलधन सहित मूलधन और ब्याहज के भुगतान का ब्यौ‍रा दिया जाएगा।
  • सामान्य त: लाभार्थी द्वारा विधिवत निष्पामदित मूल बैंक गारंटी लौटाने पर बैंक गारंटी बंद कर दी जाएगी और मार्जिन मनी लौटा दी जाएगी। इसके अभाव में यह इसकी अवधि समाप्ता होने के एक माह बाद और लाभाथी द्वारा सूचना दिए जाने के बाद बंद हो जाएगी। ऋण बंद होने के 15 दिनों की अवधि के अंदर ग्राहक को हक विलेख लौटाया जाएगा तथा हक विलेख लौटाने में विलम्बभ होने पर या बैंक की अभिरक्षा से हक विलेख गुम हो जाने पर ग्राहक को बैंक की क्षतिपूर्ति नीति के अनुसार समुचित क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
  • बैंक पहले ही आधार दर को अपना चुका है। स्विचओवर के लाभ और ग्राहकों को उपलब्धं विकल्प। हमारे वेबसाइट पर प्रदर्शित हैं
  • आधार दर आदि में परिवर्तन होने के कारण लिए गए ऋण पर ब्यााज दर में परिवर्तन की सूचना देने हेतु बैंक एसएमएस अथवा ई-मेल एलर्ट भेजेगा।

अंतिम डिलीवरी चैनल शाखा कार्यालय/विशिष्टउ शाखा कार्यालय हैं इसके अतिरिक्ता वैकल्पिक डिलीवरी चैनल उपलब्धा है अर्थात एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग सेवा, मोबाइल बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड आदि। यह शाखा प्रबंध की जिम्मेददारी है कि वह निर्धारित मानकों/मानदंडों के अनुसार ग्राहकों को सेवा प्रदान करे। किसी शंका/शिकायत का निस्तागरण शाखा प्रबंधक को करना है।
ग्राहक उत्पापदों/सेवाओं का विवरण शाखा से प्राप्त कर सकते हैं अथवा बैंक के पब्लिक डोमेन वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। किसी योजना/सेवाओं के निबंधन एवं शर्तों में किसी भी समय परिवर्तन/संशोधन करने करने का बैंक का अधिकार सुरक्षित है।
ग्राहकों द्वारा अपेक्षित दस्तातवेज प्रस्तुेत किए जाने के अध्यमधीन विभिन्नन लेनदेनों(ट्रोजेक्शदन) हेतु निर्देशात्मेक समय मानक नीचे दिए गए हैं:

  1. अपने खातों एवं पास्बुक की नियमित रूप से जाँच करते रहें।
  2. आहरण-पर्ची के जरिए बचत खाते से नगदी निकालते समय पासबुक साथ लेकर आएँ । पासबुक को समय समय पर अद्यतन कराते रहें ।
  3. चेकबुक तथा पासबुक की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करें। पासबुक, चेक बुक, ए.टी.एम./डेबिट कार्ड को एक साथ न रखा जाए।
  4. जहाँ तक सम्भव हो, रेखित / एकाउंट पेयी चेक ही जारी किया जाए।
  5. चेक ड्रॉप बॉक्स में चेक डालने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि चेक को क्रॉस कर दिया गया है तथा उसके पीछे खाता संख्या एवं मोबाइल नम्बर लिख दिए गए हैं।
  6. शाखा में समाहरण हेतु चेक के प्रस्तुत किए जाते समय / ड्रॉप बॉक्स में चेक के डाले जाते समय, बैक अधिकारी/कर्मचारी से पावती प्राप्त की जा सकती है।
  7. जारी किए जाने के समय चेक पर दर्ज विवरण जैसे कि तारीख, अंकों एवं शब्दों में लिखी गई राशि, रेखांकन आदि की जाँच कर ली जानी चाहिए । जहँ तक सम्भव हो, चेक को निकटतम रुपए की संख्या तक राउंड ऑफ करते हुए ही जारी किया जाए ।
  8. किसी प्रकार की क्षति की रोकथाम के लिए, चेक को बिना किसी कटिंग/ऑवरराइटिंग के जारी किया जाए । चैकों में किसी प्रकार के संशोधन/फेरबदल न की जाए । आदाता के नाम या अंकों अथवा शब्दों में लिखी गई राशि में किसी प्रकार के परिवर्तन के मामले में ग्राहक कृपया नए चेक पन्ने का इस्तेमाल करें । इससे बैंक को धोखाधडीपूर्ण फेरबदल की पहचान करने एवं नियंत्रित करने में सुविधा होती है । तारीख में की गई कटिंग गतावधि चेक को पुन: वैंध किए जाने के लिए ही होनी चाहिए । आदाता के नाम या चेक की राशि के लिखने की जगह पर खाली रहे स्थान को लाइन खींचकर या क्रॉस लगाकर सुरक्षात्मक रूप से भर दिया जाना चाहिए ।
  9. कटिंगयुक्त चैकों को यदि वे ‘चेक ट्रंकेशन सिस्टम’ (सी टी एस) के अंतर्गत समाशोधन के लिए प्रस्तुत होते हैं तो बैंक द्वारा अस्वीकृत किया जा सकता है, भले ही कटिंग/ग्स को अधिप्रमाणित ही क्यों न किया गया हो ।
  10. चेकों या अन्य वित्तीय लिखतों को रजिस्टर्ड पोस्ट या कोरियर से ही भेजा जाए। कोरे चेक हस्ताक्षरित न करें । पासबुक या चेक आदि पर अपने नमूना हस्ताक्षर भी दर्ज न करें ।
  11. पर्याप्त राशि रखे बिना चेक जारी न करें । बैंक द्वारा विनिर्धारित न्यूनतम बैलेंस को खाते में बनाए रखा जाए ।
  12. नामांकन सुविधा का प्रयोग करें ।
  13. खाता संख्या, सावधि जमा रसीदों का विवरण तथा लॉकर नम्बर आदि को अन्यत्र नोट करके रखें ।
  14. पते, टेलीफोन नम्बर आदि में कोई परिवर्तन होने पर शाखा को सूचित करें ।
  15. माँग ड्राफ्ट, सावधि जमा रसीद, चेक पर्चियाँ/बुक, लॉकर की चाबी, ए.टी.एम. कार्ड आदि के गुम हो जाने पर शाखा को तुरंत सूचित करें ।
  16. ब्याज, किस्तें, लॉकर किराया तथा अन्य देयों को समय पर अदा करें ।
  17. खाता खोले जाने हेतु ऐसे किसी आदमी का परिचयांकन न करें जिसे आप व्यक्तिगत रूप से न जानते हों ।
  18. डी-मेट खातों की डिलीवरी बुक की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करें तथा इसमें कोई कोरी स्लिप हस्ताक्षरित करके न रखें ।
  19. ग्राहक सेवा में कमी से सम्बन्धित किसी भी शिकायत को यथासमय प्रस्तुत किया जाना चाहिए तथा साथ ही यह भी कि यह सम्बन्धित रिकॉर्ड के सुरक्षित रखे जाने सम्बन्धी अवधि के अंतर्गत ही हो ।
  20. खाते में लेनदेन करते रहें ताकि यह ऑपरेटिव/एक्टिव बना रहे । यदि आप किसी अवधि के दौरान खाते को प्रचालित न करना चाह्ते हों तो शाखा को तदनुसार सूचित करें ।
  21. लेनदेनों की पुनरावृति के लिए स्थायी अनुदेशों का प्रयोग करें ।
  22. डेबिट कार्ड/ए.टी.एम. कार्ड की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करें । जहाँ कहीं कार्ड पर हस्ताक्षर अनिवार्य हों, उसे खाली न छोडा जाए ।
  23. इंटरनेट पासवर्ड तथा क्रेडिट/डेबिट कार्ड पिन की गोपनीयता सुनिश्चित करें ।
  24. ए.टी.एम./डेबिट कार्ड खो जाने की स्थिति में शाखा को वस्तुस्थिति तुरंत नोट कराएँ तथा उनका दुरुपयोग रोके जाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हेतु अनुरोध करें । जब तक शाखा को इस बारे में नोट न करा दिया गया हो, तदहेतु ग्राहक को ही जिम्मेदार माना जाएगा ।
  25. अपने डेबिट कार्ड कभी भी इधर उधर न छोड़ें । कार्ड को मोड़ा न जाए ।
  26. किसी को भी अपना खाता विवरण, पासवर्ड या अन्य कोई सुरक्षा सम्बन्धी सूचना न दें । इस तरह की कोई सूचना किसी वेबसाइट पर भी पोस्ट न करें क्योंकि ऐसा करना कभी भी जरूरी या अपेक्षित नहीं रहता है । अपने पिन नम्बर को याद रखें तथा समय समय पर इसे बदलते रहें ।
  27. ऐसे किसी अनधिकृत ई-मेल / ई-मेल का जवाब न दें जिसमें आपका पासव्रड/पिन माँगा गया हो ।
  28. एस.एम.एस. एलर्ट सुविधा का उपयोग करें तथा मोबाइल नम्बर में होने वाले किसी भी परिवर्तन को नोट करा दें ।
  29. अन्य किसी साइट या ई-मेल के माध्यम से इंटरनेट बैंकिंग साइट तक पहुँच बनाने से दूर रहें । डोमेन नाम का सत्यापन कर लें ताकि वेबसाइट फर्जी न हो ।
  30. इंटरनेट बैंकिंग साइट तक पहुँच बनाने के लिए किसी साइअबर कैफे या / अन्य व्यक्तियों के द्वारा प्रयोग किए जाने वाले पी.सी. का प्रयोग न करें ।
  31. प्रयोग में न लाने पर पी.सी. को लॉग-ऑफ कर दें ।
  32. यह अच्छा होगा कि आप अपने डेस्कटॉप पर पर्सनल फायरवाल सोफ्टवेयर एवं एंटीवायरस सोफ्टवेयर इंस्टाल कर लें तथा उपलब्ध नवीनतम अपडेट्स को नियमित तौर पर डाउनलोड करते रहें । किसी प्रकार का शक होने पर किसी गोपनीय सूचना/संवेदनशील जानकारी फीड करने से पूर्व वैबपेज पर पैडलॉक सिम्बल/आइकोन की डबल चैकिंग कर पुष्टि कर लें कि साइट सुरक्षित मोड में चल रही है ।
  33. इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड को नियमित रूप से बदलते रहें । पासवर्ड के रूप में अक्षर, विशेष संकेत चिह्न एवं संख्या का कोई संयुक्त रूप रखें ।
  34. विंडो बन्द करने से पूर्व इंटरनेट बैंकिंग से हमेशा लॉग आउट कर लें । इंटरनेट बैंकिंग लॉग इन आई डी एवं पासवर्ड डालने हेतु और विशेषकर जब कि आप अपना निजी पी सी प्रयोग न कर रहे हों, आप वर्चुअल की बोर्ड का प्रयोग करें । की स्ट्रोक्स के पकड़ लिए जाने का जोखिम हो सकता है ।
  35. इंटरनेट एक्सप्लोरर ब्राउअजर में आई डी/पिन स्टोर न करें ।
  36. अपने खाते के किसी लेनदेन की किसी जाँच हेतु बैक / पुलिस/ अन्य किसी जाँच एजेंसी के साथ सहयोग करें ।
  37. सेवाओं से सम्बन्धित किसी भी कमीं को बैंक की जानकारी में लाएँ ।
  38. सेवाओं से सम्बन्धित किसी भी कमीं को बैंक की जानकारी में लाएँ ।
  39. सही पैन नम्बर / 15 जी या 15 एच को वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में प्रस्तुत / जमा कर दिया जाए ताकि सही रूप से टी.डी.एस. की कटौती की जा सके ।
  40. खाताधारक द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खाते का प्रयोग किसी प्रकार की मनी लॉंड्रिंग या धोखाधडी वाले लेनदेन के लिए न हो ।
  41. ग्राहक का कर्तव्य : बैंक ऋण का सही उपयोह एवं यथासमय अदायगी ।
  1. बी सी एस बी आई कोड पब्लिक डोमेन वेबसाइट पर प्रदर्शित हैं ।
  2. ग्राहकों को बैंकिंग में तकनीकी का प्रयोग करने के लिए शिक्षित किए जाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएँगे । इस उद्देश्य के लिए बैंक प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, ऑल इंडिया रेडियो का प्रयोग करेगा । ग्राहकों के लिए शाखा स्तर पर लघु प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे ।
  3. विभिन्न प्रकार के शुल्क/सेवा प्रभार एवं दंड लगाए जाने के सम्बन्ध में बैंक द्वारा ग्राहकों से पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी ।
  4. बैंक द्वारा एक समुचित ग्राहक शिकायत/सहायता केन्द्र स्थापित किया गया है जो विभिन्न चैनलों जैसे कि – शाखा, प्रधान कार्यालय कॉल सेंटर, इंटरनेट एवं मोबाइल पर संघटित रूप से कार्य करता है ।
  5. ग्राहक शिक्षा एवं सेवा में सुधार हेतु सुझाव प्राप्त करने के लिए विभिन्न तकनीकी चैनलों का प्रयोग किया जाएगा ।
  6. ग्राहक सेवा सम्बन्धी मुद्दों एवं शिकायतों के सम्बन्ध में बैंक द्वारा तत्सम्बन्धित ग्राहक रिलेशशिप मैनेजमेंट सिस्टम क्रियान्वित किया जाएगा ।
  • हम आपकी संतोषजनक सेवा करने तथा आपको सुखद बैंकिग का अनुभव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं । तथापि, यदि आपको ऐसा लगे कि हमारी सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है और आप अपना कोई सुझाव देना चाहें या आपको कोई शिकायत हो तो इसके लिए आपका स्वागत है । हमारा प्रयास रहेगा कि आपकी शिकायत को हम आगे प्रशंसा में बदल सकें ।
  • हमारी सेवाओं या उत्पादों के बारे में किसी प्रकार की कोई शिकायत होने पर आप उसके तत्काल निराकरण के लिए उसे शाखा प्रबन्धक के ध्यान में ला सकते हैं । कृपया शाखा से फीडबैक/शिकायत फॉर्म प्राप्त करें या उसे पब्लिक डोमेन वेबसाइट से डाउनलोड कर लें तथा पावती लेकर शाखा को प्रस्तुत कर दें अथवा ई-मेल के माध्यम से प्रधान कार्यालय के ग्राहक सेवा विभाग को भेज दें ।
  • ऑन लाइन शिकायत निवारण व्यवस्था:

  • बैंक द्वारा अपनी वैबसाइट पर शिकायतों के ऑन लाइन पंजीकरण की व्यवस्था की जएगी । ऑन लाइन शिकायत व्यवस्था के अंतर्गत शिकायत को दर्ज कराने, शिकायत की स्थिति जानने तथा बैंक से जवाब प्राप्त करने के लिए ग्राहक की पहुँच होगी ।
  • निवारण न होने की स्थिति में आप निम्नलिखित से सम्पर्क कर सकते हैं :

  • यदि शाखा प्रबन्धक द्वारा 7 दिनों के अन्दर शिकायत का निराकरण नहीं हो पाता है तो कृपया सम्बन्धित मंडल प्रमुख से सम्पर्क करें जो कि मंडल का नोडल शिकायत निवारण अधिकारी है । ग्राहक अपनी शिकायतें प्रधान कार्यालय स्तर से निवारण के लिए मुख्य नोडल अधिकारी को भी प्रस्तुत कर सकते हैं । नॉडल अधिकारियों के नाम, पते, संपर्क नम्बर, फैक्स नम्बर, मोबाइल नम्बर बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं । हमारे टोलफ्री हेल्पडेस्क नम्बर तथा अन्य अधिकारियों के सम्पर्क विवरण शाखा के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित हैं ।
  • निम्नांकित कारणों से हुई ए.टी.एम. सम्बन्धी शिकायतें:-

  • (क) नगदी का न मिल पाना
  • (ख) नगदी का पूरा न मिलना
  • (ग) खाते का दो बार नामे हो जाना परंतु राशि का एक ही बार प्राप्त होना
  • (घ) ए.टी.एम. कार्ड की चोरी / गुमशुदगी नोट कराए जाने के बावजूद उसके लेनदेनों को न रोका जाना( नॉन हॉट लिस्टिंग)
  • मामले का पूर्ण विवरण देते हुए शिकायत को उस शाखा में जहाँ आपका खाता है या पदनामित सम्पर्क अधिकारी को प्रस्तुत किया जा सकता है । स्म्पर्क अधिकारी का पता सभी ए.टी.एम. स्थलों, शाखाओं एवं हमारी वेबसाइट पर प्रदर्शित है । तथापि, यदि शिकायत का निवारण नहीं हो पाता हि तो उसे निम्नांकित अधिकारी को भेजा जा सकता है:

  • मुख्य नोडल अधिकारी एवं मुख्य शिकायत निवारण अधिकारी हमारा प्रयास होगा कि आपकी शिकायत शीघ्रातिशीघ्र दूर हो सके । यदि इतना सब कुछ होने के बावजूद ग्राहक संतुष्ट न हो तो वह बैंक के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक महोदय को लिख सकता है ।
  • यदि एक माह के अन्दर आपकी संतुष्टि के अनुरूप शिकायत दूर नहीं हो पाती है तो आप निम्नानुसार आगे जा सकते हैं :
  • बैंकिंग लोकपाल जो कि भारतीय रिज़र्व बैंक की लोकपाल योजना 1995 जिसे आगे चलकर बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 के रूप में पुन: प्रवर्तित किया गया है, के तहत राज्यों की राजधानियों में मौजूद हैं । फिलहाल, बैंकिंग लोकपाल 15 स्थानों पर हैं । बैंकिंग लोकपाल के पते एवं कार्यक्षेत्र का विवरण पब्लिक डोमेन वेबसाइट पर दिया गया है ।
  • ग्राहक अपनी शिकायतें वेब आधारित पोर्टल - सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल एंड मॉनीटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) जो कि डायरेक्ट्रेट ऑफ पब्लिक ग्रीवांसेज (DPG), डिपार्टमैंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफोर्म्स एंड पब्लिक ग्रीवांसेज, गवर्नमैंट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित किया गया है, के माध्यम से भी दर्ज करा सकते हैं ।
  • बेनामी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जाएगा ।

  • यह नागरिक अधिकार पत्र, अन्य बिन्दुओं के साथ साथ, ग्राहकों को बैंक द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं हेतु प्रतिश्रुत समय सीमा की जानकारी देता है तथा ग्राहक के अधिकारों एवं कर्तव्यों की बेहतर अग्रदर्शिता के लिए इसे ‘कोड ऑफ बैंक्स कमिटमैंट्स टू द कस्टमर्स’ जो कि बैंकों द्वारा स्वैच्छिक तौर पर अपनाया गया है तथा जिसके कार्यान्वयन पर ‘बैंकिंग कोड्स एंड स्टैंडर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया’ (BCSBI) द्वारा निगरानी रखी जाती है, के साथ पढ़ा जाए ।
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वर्षों से आपकी सेवा में
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शाखाएँ
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92441
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