उचित व्य‍वहार

उचित व्य‍वहार संहिता

खुदरा ऋण के मामले में व्यातवसायिक, दक्ष, विनम्र, कर्मठ एवं त्‍वरित सेवाएं प्रदान करना

  • किसी के साथ भी धर्म, जाति, लिंग, वंश या इनमें से किसी एक के आधार पर भेदभाव न करना।
  • ऋण उत्पा दों के विज्ञापन एवं विपणन में निष्प क्षता एवं ईमानदारी बरतना।
  • ग्राहकों को ऋण लेनदेन से संबंधित शर्तों, लागत, अधिकारों और देयताओं के बारे में सटीक एवं समय पर जानकारी देना।
  • ऋण हेतु आवेदन करने के लिए यदि ग्राहक को किसी सहायता की आवश्य,कता हो तो उसे ऐसी सहायता उपलब्धे करवाना।
  • ग्राहक के साथ किसी विवाद अथवा मतभेद को संगठन के अंदर शिकायत निवारण कक्ष के माध्यहम से सदभावनापूर्ण ढंग से निपटाना।
  • सभी विनियामक अपेक्षाओं का सदभावनापूर्ण ढंग से अनुपालन करना।
  • ऋण हेतु संविदा के संभाव्य् जोखिम के बारे में सामान्य जागरूकता पैदा करना और ग्राहक को इस बात के लिए प्रोत्सा‍हित करना कि वह स्वनतंत्र रूप से वित्तीकय सलाह प्राप्तक करे और केवल बैंक के निवेदन के अनुसार कार्य न करे।
  • भावी ग्राहक को उसकी आवश्ययकता के अनुकूल हमारे बैंक में उपलब्ध ऋण उत्पारदों की श्रृंखला के बारे में सभी आवश्योक जानकारी पर्याप्तह रूप से उपलब्धं करवाना।
  • चयन के संबंध में ग्राहक को उसकी पंसद के ऋण उत्पापद का चयन करने हेतु प्रासंगिक जानकारी दी जाएगी।
  • ग्राहक को ऋण की संस्वी कृति और संवितरण तक की प्रक्रिया बताई जाएगी और उस समय सीमा की सूचना दी जाएगी जिसके अंदर सामान्यित: बैंक द्वारा यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
  • ग्राहक को शाखाओं के नाम और फोन नं. की जानकारी दी जाएगी और उन व्यऔक्तियों के नामों की जानकारी दी जाएगी जिनसे वह अपनी जरूरत के अनुसार ऋण लेने हेतु संपर्क कर सकता है।
  • ग्राहक को ऋण खाते की सर्विसिंग और उसे बंद करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
  • विभिन्नि ऋण उत्पा दों हेतु ब्यायज दर और उनमें परवर्ती संशोधन की सूचना किसी एक अथवा सभी माध्य मों से उपलब्धह कराई जाएगी अर्थात बैंक की वेबसाइट, जहां टेली बैंकिंग सुविधा उपलब्धम है वहां टेलीफोन पर, अन्य माध्यमम से।
  • मौजूदा ग्राहकों को ब्या ज दर में संशोधन की सूचना ब्याउज दर में परिवर्तन की तारीख से 3 दिनों के अंदर बिंदु सं.6 में उल्लिखित माध्य म से दी जानी चाहिए।
  • बैंक प्रस्ताबवित ग्राहकों को डिफाल्ट ब्यााज/दांडिक ब्या।ज दर की सूचना स्पाष्ट रूप से देगा।
  • ग्राहक मांग करने पर अपने खातों पर प्रयोज्य ब्याबज दरों का अद्यतन विवरण प्राप्तत करने के हकदार होंगे। मांग करने पर ग्राहकों को खाते में ब्याज लगाने की पद्धति का पूर्ण विवरण दिया जाएगा।
  • बैंक ग्राहकों को उनके ऋण खाते के संबंध में देय सभी प्रभारों के विवरण की जानकारी देगा।
  • बैंक प्रस्ताेवित ग्राहकों के लाभ के लिए प्रभारों से संबंधित सभी विवरणों और परवर्ती संशोधनों (सामान्यित: रिटेल उत्पाेदों के संबंध में) की जानकारी बिंदु सं. 6 में निर्दिष्ट् माध्यैम से उपलब्धन कराएगा।
  • खाते पर लगाए जाने वाले ब्याउज और प्रभार, जहां आवश्यपक हो, को बैंक स्पतष्टं रूप से विनिर्दिष्ट करेगा और उक्तर खाते को नामे लिखने हेतु प्रलेखन के समय उनसे अधिदेश प्राप्ति करेगा।
  • बैंक सामान्यधत: ऋण हेतु किए गए अनुरोध की पावती देगा और यदि ग्राहक द्वारा मांग की जाती है तो ग्राहक द्वारा अपनी पसंद के उत्पानद और सेवा का चयन करते ही उसे आवेदन पत्र की विधिवत अभिस्वीाकृत प्रति भी दी जाएगी।
  • ऋण संस्वी कृत करने का निर्णय लेने के तत्का्ल बाद बैंक उन दस्ता वेजों के प्रारूप दर्शाएगा जिन्हें ग्राहक द्वारा निष्पाेदित किया जाना है और यदि ग्राहक मांग करता है तो बैंक उसे ऋण की संस्वी कृति और संवितरण के प्रासंगिक निबंधनों एवं शर्तों के बारे में बताएगा।
  • ऋण आवेदन पत्र, प्रारूप प्रलेख अथवा ग्राहक द्वारा हस्ताधक्षर किए जाने वाले ऐसे अन्यब कागजातों में उसकी पसंद के उत्पााद और सेवा से संबंधित सभी निबंधन एवं शर्तें विस्तार से दी जाएंगी।
  • जहां संभव हो वहां ग्राहक को ऋण आवेदन निरस्त किए जाने का कारण बताया जाएगा।
  • ऋण संवितरण से पूर्व एवं ऋण दस्तातवेज निष्पागदित किए जाने के तत्कायल बाद बैंक विधिवत निष्पाणदित दस्तादवेजों की एक प्रति ग्राहकों को सुपुर्द करेगा।
  • जब तक ग्राहक आवश्य क समझे तब तक बैंक उसे नियमित रूप से खातों का विवरण उपलब्धर कराएगा।
  • बैंक तय ब्या ज दर, दांडिक ब्याेज, डिफाल्टत ब्यांज एवं प्रभारों के प्रयोज्यम होने की प्रासंगिक देय ति‍थियों को अधिसूचित करेगा यदि इनका उल्ले ख ऋण आवेदन, दस्ता्वेजों अथवा पत्राचार में नहीं किया गया है।
  • बैंक लेखा परिपाटियों में किसी प्रकार के परिवर्तन, जिससे ग्राहक प्रभावित होता हो, को कार्यान्वित करने से पहले अधिसूचित करेगा।
  • ग्राहक की सभी व्यणक्तिगत जानकारी गोपनीय होगी और ग्राहक की सहमति के बिना किसी तृतीय पक्ष के समक्ष प्रकट नहीं की जाएगी। “तृतीय पक्ष” में सभी विधि प्रवर्तन एजेंसियां, ऋण सूचना ब्यू रो, भारतीय रिजर्व बैंक, अन्यव बैंक और वित्तीयय संस्थाेएं शामिल नहीं होंगी।
  • उपर्युक्ती पैरा के अध्य्धीन ग्राहक संबंधी सूचना केवल निम्नीलिखित परिस्थितियों में प्रकट की जाएगी, अर्थात:
  • यदि बैंक विधि द्वारा बाध्य है
  • यदि सूचना को प्रकट करना लोक हित में हो
  • यदि बैंक के हित में प्रकटीकरण अपेक्षित हो
  • बैंक ग्राहक को प्रोत्साेहित करेगा कि वह अपनी वित्तीवय विपदा के बारे में बताए जिससे ऐसे मामले बैंक की जानकारी में आने पर बैंक इन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सके।
  • बैंक शिकायत निवारण से संबंधित सभी विवरण उपलब्धा कराएगा अर्थात;
  • शिकायत कहां दर्ज की जा सकती है
  • शिकायत कैसे की जानी चाहिए
  • शिकायत का उत्त र मिलने का संभावित समय
  • शिकायत निवारण के लिए किससे संपर्क किया जाना है आदि
  • शिकायत पर सकारात्मषक अथवा नकारात्मिक प्रतिक्रिया अथवा शिकायत निवारण हेतु मांगे जाने वाले अतिरिक्त‍ समय की अवधि अधिकतम चार सप्तारह होगी जब तक कि शिकायत का स्वलरूप इस प्रकार का न हो जिसमें काफी मात्रा में तथ्यों और आंकड़ों का सत्यातपन अपेक्षित हो।
152
वर्षों से आपकी सेवा में
3250
शाखाएँ
4.58
करोड़ ग्राहक
92441
सीएएसए (करोड़ में)