आलबैंक विद्या

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आलबैंक विद्या

    उद्देश्य
  • शैक्षिक ऋण योजना का उद्देश्य भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मेधावी विद्यार्थियों को बैंकिंग प्रणाली से वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • जो मेधावी छात्र, भले ही वह गरीब है, उसे वहनीय निबंधन और शर्तों पर शिक्षा को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता बैंकिंग प्रणाली द्वारा दी जाती है।
  • एचएससी (10 प्लस 2 या समतुल्यद) पूरा होने के बाद प्रवेश परीक्षा / मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से भारत या विदेश में मान्यता प्राप्त संस्थानों में उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में प्रवेश सुनिश्चित होना चाहिए।
  • जहाँ प्रवेश विशुद्ध रूप से अर्हक परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है तो ऋण पात्रता के लिए कट ऑफ अंक 50% है।
  • प्रबंधन कोटा के तहत प्रवेश पानेवाले मेधावी छात्र भी ऋण के लिए पात्र हैं।
  • भारत में अध्ययन (सांकेतिक सूची):
  • यूजीसी /सरकार/ एआईसीटीई / एआईबीएमएस / आईसीएमआर आदि द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रम ।
  • विदेश में अध्ययन:
  • प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों द्वारा रोजगारोन्मुएख व्याएवसायिक / तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए।
    ऋण सीमा:
  • महाविद्यालय / स्कूल / छात्रावास को देय शुल्क/ एवं अन्य संबंधित खर्चे।
  • भारत में अध्ययन:
  • संस्थान के आधार पर रु.75 लाख तक। (संस्थानों की सूची बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध है।)
  • विदेश में अध्ययन:
  • रु.75 लाख।.
  • • संस्थानों की सूची
  • ऋण दस्तावेजों को विद्यार्थी और माता-पिता / अभिभावक द्वारा संयुक्त उधारकर्ता के रूप में संयुक्त रूप से निष्पादित किया जाना चाहिए।
  • पति या पत्नी को सह-उधारकर्ता होना चाहिए यदि पात्रता के लिए उसकी आय पर विचार किया जाता है। कोई संपार्श्विक नहीं, कोई गारंटी नहीं।
  • रु.4 लाख तक- कोई संपार्श्विक प्रतिभूति नहीं
  • रु.4 लाख से अधिक- (पाठ्यक्रम / संस्थानों के आधार पर) प्रतिभूति तृतीय पक्षकार गारंटी, माता-पिता की सह-बाध्यहता, पूर्ण संपार्श्विक प्रतिभूति भिन्न–भिन्ने होती है
  • 15 साल तक