ऑल बैंक रेंट ऋण

    उद्देश्य :
  • व्यावसायिक /व्यक्तिगत आवश्यकतओं को पूरा करने हेतु, किंतु सट्टेबाजी के प्रयोजन के लिए नहीं
  • संपत्ति के स्वामी जिन्होंने अपनी संपत्ति प्रतिष्ठित कंपनियों/वाणिज्यिक प्रयोजनार्थ दुकानों/ औद्योगिक/सॉफ्टवेयर कंपनियों, एमएनसी, बैंक, पीएसयू/प्रतिष्ठित सरकारी/अर्ध-सरकारी संस्थानों बीमा कंपनियों इत्यादि को उनके व्यवसाय या और कार्यालय के बुनियादी संरचना हेतु मानव शक्ति सहित/रहित (प्लग एंड प्ले मॉडल)आदि की सेवाएँ प्रदान करने हेतु किराये पर दी हो एवं सहमत शर्तों के अनुसार भविष्यल में नकदी प्रवाह/पट्टा किराया सहित प्राप्यच राशियों, सेवा प्रभार, एजेंसी कमीशन द्वारा न्यू नतम गारंटीकृत राशि इत्यादि का आश्वा/सन दिया हो।
  • ऐसे संपत्ति के स्वामी जिन्होंने अपना परिसर इलाहाबाद बैंक को किराये पर दे रखा है, वे भी पात्र हैं।
    ऋण सीमा :
  • न्यूनतम: रु.1.00 लाख
  • अधिकतम: रु.200.00 करोड़ या आवेदक की आवश्यकतानुसार या तय की गयी सीमा तक, जो भी कम हो ऋण राशि का आकलन इस प्रकार होना चाहिए कि उसकी अदायगी लीज की शेष अवधि में अथवा अधिकतम 120 माह, जो भी पहले हो, में हो जाए।
  • मार्जिन
  • 10%
    प्राथमिक:
  • भावी नकदी प्रवाह/पट्टा किराया सहित प्राप्य राशियों, सेवा प्रभारों, एजेंसी कमीशन, न्यूनतम गारंटीकृत राशि आदि का समनुदेशन।
  • संपार्श्विक :
  • संबंधित अचल संपत्ति जिसका बाज़ार मूल्य प्रस्तावित ऋण राशि के 125% से कम नहीं हो का साम्यिक बंधक/परस्पर प्रभार, यदि किसी वैध कारण से, चाहे जो भी हो, अचल संपत्ति का साम्यिक बंधक संभव न हो तो किसी अन्य संपत्ति को प्रतिभूति के रूप में बंधक रखने हेतु आग्रह करना चाहिए, जिसका बाज़ार मूल्य प्रस्तावित ऋण के 150% से कम न हो।
  • अथ
  • राष्ट्रीय बचत पत्र/बैंक की अपनी जमाराशि के मूल्य का 100%
  • अथवा
  • 125% कवर अंशतः संबंधित अचल संपत्ति द्वारा तथा अंशतः राष्ट्रीय बचत पत्र/बैंक की अपनी निजी जमा इत्यादि जैसी प्रतिभूति के द्वारा। इस योजना के अंतर्गत खाली ज़मीन को संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में केवल निम्नांकित प्रयोजन हेतु इस शर्त के साथ स्वीकार किया जाएगा कि संबंधित भूमि कृषि भूमि/विभाजन विलेख के आधार पर गृहीत भूमि है नहीं है। इसके अतिरिक्त भूमि पहचान योग्य हो आवासीय/वाणिज्यिक क्षेत्र में स्थित हो तथा सरलतापूर्वक विपणन के योग्य हो केवल तभी।
    • भूमि फैक्ट्री हेतु किराये पर है जहाँ अस्थायी रूप से ढाँचा खड़ा किया गया है।
    • अथवा
    • कतिपय मामलों में जहाँ किसी भी वैध कारण से, चाहे जो भी हो, संबंधित संपत्ति का बंधक संभव न हो, भूमि के रूप में किसी अन्य संपत्ति को प्रतिभूति के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है।
  • समान मासिक किस्तोंे में, जिसे 120 माह से अनधिक अवधि अथवा लीज/करार की असमाप्तह अवधि, जो भी पहले हो, हेतु वृद्धि के प्रावधान के अनुसार किराये के अनुरूप बदला जा सकता है।
  • अधिकतम 108 माह (समान मासिक किस्तें)